चलें थे इश्क को अजमाने
अचानक पैर क्यूं गये थम,
बहुत-सी झेली मुश्किलें
बहुत-से मिलें ग़म,
सोचते हैं अक्सर कौन-से चक्कर में
कब और कहां रह गये हम।
चलें थे इश्क को अजमाने
अचानक पैर क्यूं गये थम,
बहुत-सी झेली मुश्किलें
बहुत-से मिलें ग़म,
सोचते हैं अक्सर कौन-से चक्कर में
कब और कहां रह गये हम।