ढलती धूप के संग Hindi poetry Dhalti Dhoop ke Sang

तुम होते तो
अलग होते जिन्दगी के रंग,
बिना तुम्हारे ख़ोज रहा हूं
जीने के ढंग,
अलग मज़े थे उस दौर के
जो दिन जिये तुम्हारे संग,
रोज कोसता हूं उस दिन को
मन में उठी थी जिस दिन उमंग,
खिल रहा था चेहरा तेरा
मेरे चेहरे का था फीका रंग,
रोज देखता हूं रास्ते
कहीं लौट आओ ‌ढलती धूप के संग।

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