नहीं लगती है किसी मरज की दवा हमारे,
जीने का ना कोई मक़सद सिवा तुम्हारे।
दिख जाते हों एक नजर तो खिल जाते हैं दिल हमारे,
बैचेनी सी रहती है दिल में बिना तुम्हारे,
क्या दवा है इस मरज की कौन जाने सिवा तुम्हारे।
नहीं लगती है किसी मरज की दवा हमारे,
जीने का ना कोई मक़सद सिवा तुम्हारे।
दिख जाते हों एक नजर तो खिल जाते हैं दिल हमारे,
बैचेनी सी रहती है दिल में बिना तुम्हारे,
क्या दवा है इस मरज की कौन जाने सिवा तुम्हारे।
Nice lines
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