बादल आने की खुशी

लगा गरजने एक दम से
आ गयी गांव में खुशी,
सबके चेहरे प्रफुल्लित थे
अजब सी छाई थी खुशी।
लगा बरसने दम दमा दम
बर्तन भरने की होड़ लगी,
बुड्ढे बैठे सोच रहे थे
उनके मन में भी थी खुशी।
गजब सी खुशबू थी मिट्टी में
फ़सल भी मानों झूम उठीं,
पेड़ पौधे चमक रहें थे
फूलों की महक में थीं अजीब खुशी।
सारे पंछी उछल रहे थे
मानों चहचहाने में होड़ लगी,
सभी खड़े थे अपने खेत किनारे
झलक रही थी आंखों से खुशी।
बनने लगे पकोड़े और सेवईयां
खुशबू चारों तरफ उड़ने लगी,
झलक रही हर तरफ से
बादल आने की खुशी।
देख हरियाली हर तरफ
पशुओं कि आंखे चमक उठी,
चारों तरफ उत्साह था
ऐसी होती हैं बरसों बाद बादल आने की खुशी।

Leave a comment